Tuesday, April 26, 2011

पैगंबर मुहम्मद- की साधारण (सादा) जीन्‍दगी

नेता के रूप में  सल्लाहू आलिहि व सल्लम अपनी स्थिति के बावजूद, पैगंबर मुहम्मद का  व्यवहार  अधिक से अधिक या अन्य लोगों की तुलना में वह अपने को बेहतर कभी नहीं समझते थे .वह कभी लोगों को नीच , अवांछित या शर्मिंदा नहीं होने  देते थे  . उन्होंने अपने साथियों को  आग्रह किया  की वे कृपया और विनम्र से  जियें , जब  भी हो तो गुलाम  की  रेहाई करें ,  दान दें ,  विशेष रूप से बहुत ही गरीब लोगों को और अनाथों को किसी भी प्रकार के इनाम  की प्रतीक्षा किये  बिना मदद करें.


पैगंबर मुहम्मद सल्लाहू अलैही व सल्लम लालची नहीं थे . वह बहुत कम  और केवल सरल खाद्य पदार्थ खा लिया  करते थे .वह  पेट भरकर  खाने को   कभी पसंद  नहीं करते थे .  कभी कभी, कई दिनों के बाद खाते थे और जो रुखी सुखी मिलती खा लिया करते थे . वह फर्श पर एक बहुत ही साधारण गद्दे पर सोते  थे और उनके घर में आराम के या सजावट के  रूप  में  कुछ भी नहीं था.

एक दिन हज़रत हफ्सा,  उनकी पवित्र पत्नी – उनके गद्दे को रात में  आरामदायक बनाने के लिए,   उनको बताये बिना उनकी  चटाई  को डबल तह  कर दी ,ताकि नर्म रहे , उस रात वह चैन से सो गए , लेकिन वह देर तक सोते रहे  जिस की वजह  से उनकी सुबह सवेरे प्रार्थना की छुट गई.वह इतना परेशान हुए  कि फिर ऐसा कभी नहीं सोए!


सादा जीवन और संतुष्टि पैगंबर के जीवन के महत्वपूर्ण शिक्षा थे: "जब आप एक ऐसे व्यक्ति को देखें जिसे आप की तुलना में आप से ज्यादा ओर अधिक धन और सुंदरता मिली है , तो उनको भी देखो जिनको आप से कम  दिया गया है."  इस प्रकार की सोंच से हम अल्लाह का शुक्र अदा करेंगे , बजाय वंचित महसूस करने के.


लोग  उनकी पवित्र पत्नी, हजरत आयशा से जो की उनके सबसे पहले और वफादार साथी अबू बकर की बेटी थीं , सवाल करते थे की  पैगंबर  मुहम्मद घर में  कैसे  रहते थे,  "एक साधारण  आदमी की तरह," वह जवाब में केहती थी . "वह घर की साफ सफाई, अपने कपड़े की सिलाई खुद से करलेते थे, अपनी सेनडल खुदसे ठीक करलेते थे ,  ऊंटों को पानी पिलाते थे, बकरी का दूध निकालते थे,  कर्मचारियों की उनके काम में मदद करते थे, और उनके साथ मिलकर अपना भोजन करते थे , और वह बाज़ार से हमको जो ज़रुरत है लाकर देते थे."


उनके पास  शायद ही कभी  एक से अधिक कपड़े के सेट थे , जो वह खुद से धोया करते थे.  वह  घर में प्यार से रहने वाले, शांतिप्रिय मनुष्य थे . उन्होंने कहा जब आप किसी घर में प्रवेश करें तो वहाँ सुख और शांति के लिए अल्लाह ताला से दुआ करें. वह दूसरों से मिलते समय -अस्सलामो अलैकुम- का शब्द कहते थे:जिसका अर्थ है "तुम पर शांति हो" शांति पृथ्वी पर सबसे बढ़िया  चीज़ है.

अच्छे शिष्टाचार में उनको पूरा पूरा विश्वास था वह लोगों को शिष्टतापूर्वक रूप से मिलते थे और बड़ों को सम्मान देते थे
एक बार उन्होंने कहा: " मुझे तुम में सब से प्यारा वह व्यक्ति लगता है जिसके व्यवहार  आच्छे हों."

उनके सभी रिकॉर्ड शब्दों और कामों से  यह प्रकट होता है की वह  एक  महान थे नम्रता, दया, विनम्रता, अच्छा हास्य और उत्कृष्ट आम भावना रख्ते थे, जो पशुओं के लिए  और सभी लोगों के लिए केवल प्यार के उपदेशक थे, विशेष रूप से उनके परिवार  के साथ.

इन सबसे ऊपर, वह एक मनुष्य थे ओर जो उपदेश दिया उसका अभ्यास किया. उनका जीवन, दोनों निजी और सार्वजनिक, अपने अनुयायियों के लिए एक आदर्श मॉडल है .

1 comment:

prerna argal said...

आपकी पोस्ट को आज ब्लोगर्स मीट वीकली(१३)के मंच पर प्रस्तुत की गई है आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप हिंदी की सेवा इसी मेहनत और लगन से करते रहें यही कामना है /आपका
ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर आपका स्वागत है /जरुर पधारें/आभार /

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